मूवी रिव्यू-‘रामायण पार्ट 1’:रणबीर की मर्यादा और यश का रौद्र रूप छाया; VFX में दिखी भव्यता, संगीत और डायलॉग थोड़े फीके, जानिए कैसी है फिल्म

एक तरफ अयोध्या के राजकुमार राम, जिनके लिए मर्यादा सबसे बड़ा धर्म है। दूसरी तरफ लंका का राजा रावण, जिसके पास ज्ञान भी है, शक्ति भी और तीनों लोकों पर राज करने का अहंकार भी। इन दोनों के आमने-सामने आने से पहले की कहानी को करीब 4000 करोड़ रुपए के विशाल सिनेमाई कैनवास पर उतारना आसान काम नहीं है।

खासकर तब, जब कहानी सिर्फ मनोरंजन नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था से भी जुड़ी हो। नितेश तिवारी की ‘रामायण पार्ट वन’ इसी जिम्मेदारी के साथ पर्दे पर आती है। रणबीर कपूर राम के रूप में गंभीर और गरिमामय नजर आते हैं, तो यश का रावण अवतार अपने रौब से अलग पहचान बनाता है।

फिल्म में अयोध्या की भव्यता है, लंका का वैभव है और एक ऐसे युद्ध की तैयारी है, जिसका इंतजार हर दर्शक को है। लेकिन इस महागाथा का पहला अध्याय आखिर कितना असर छोड़ता है? इसकी कहानी में आगे बढ़ते हैं।

कहानी: रावण के दस सिरों से शुरू होती है सत्ता और अहंकार की दास्तान

दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की शुरुआत राम से नहीं, बल्कि रावण से होती है। कहानी पहले लंका के उस राजा की दुनिया में ले जाती है, जिसके पास अपार शक्ति है, ज्ञान है और अपनी तपस्या से हासिल किए गए वरदानों का घमंड भी।

रावण (यश) कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करता है और वरदान हासिल करता है। इसके बाद उसकी महत्वाकांक्षा बढ़ती जाती है। वह इंद्र को पराजित करता है और अपने सौतेले भाई कुबेर से लंका का अधिकार हासिल कर लेता है। फिल्म रावण के उदय के साथ उसके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है।

रावण को दशानन क्यों कहा जाता है और उसके दस सिरों की पौराणिक पहचान क्या है, इस पहलू को भी कहानी में जगह मिलती है। यहां रावण सिर्फ एक शक्तिशाली राजा नहीं, बल्कि ज्ञान, तपस्या और अहंकार का ऐसा संगम है, जिसकी महत्वाकांक्षा की कोई सीमा नहीं।

इसके बाद कहानी अयोध्या की ओर मुड़ती है। भगवान विष्णु के अवतार राम (रणबीर कपूर) का जन्म राजा दशरथ के घर होता है। उनका बचपन, ऋषि विश्वामित्र के साथ यात्रा, मिथिला में सीता (साई पल्लवी) के स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ना और विवाह जैसे प्रसंग दिखाए जाते हैं।

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