सुप्रीम कोर्ट ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स की पूरी हो चुकी परियोजनाओं के मौजूदा आवंटियों के पक्ष में हस्तांतरण विलेख (कन्वेयंस डीड) निष्पादित करने की अनुमति दे दी।
शीर्ष अदालत ने बिजली शुल्क और कर्मचारियों के बकाये के भुगतान की व्यवस्था के लिए पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उससे जुड़ी इकाइयों के बैंक खाते फ्रीज करने के 13 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक ढील भी दी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची की पीठ ने गुरुवार को दिवाला कार्यवाही का सामना कर रही रियल एस्टेट कंपनी के ऋणदाता वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इन जरूरी खर्चों के लिए समाधान पेशेवर (आरपी) को पर्याप्त धन उपलब्ध कराएं। 13 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने घर खरीदारों के अधिकारों के प्रति पार्श्वनाथ डेवलपर्स की “बेशर्म उपेक्षा” पर कड़ी फटकार लगाई थी।
पीठ ने पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और उनके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के अपने घरों का कब्जा पाने के लिए 20 साल तक संघर्ष करने पर गौर करते हुए कंपनी के नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे। पीठ ने स्पष्ट किया कि हस्तांतरण विलेख की अनुमति का इस्तेमाल संपत्तियों में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।