SIR विवाद पर चुनाव आयोग बोला- फैसले सर्वसम्मति से हुए:वोटरों के नाम हटाने से फॉर्म-6 और डेटाबेस तक, 8 पॉइंट में दिए जवाब

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में फैसले लेने का अधिकार तीन अधिकारियों के पास है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं।

चुनाव आयोग के फैसलों में मतभेदों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं ECI ने इन सभी आरोपों का जवाब देते हुए बताया कि मतभेदों के बाद भी फैसला तब लिया जाता है, जब चुनाव आयुक्तों के बीच सर्वसम्मति होती है।

चुनाव आयोग ने मतेभदों के आरोपों पर दी सफाई

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने आज बुधवार को बताया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वोटर लिस्ट को ठीक करने (क्लीनअप) के दौरान कई राज्यों में नाम हटाने समेत कई मुद्दों पर चिंता जताई थी, लेकिन पूरे देश में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयोग एकमत था।

अधिकारियों ने यह बात एक मीडिया रिपोर्ट के बाद कही, जिसमें दावा किया गया था कि SIR के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई थी।

सवालों का जवाब देते हुए अधिकारियों ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने वोटर लिस्ट को ठीक करने के दौरान कई राज्यों में नाम हटाने और वोटर डेटाबेस को संभालने से जुड़े फैसलों पर चिंता जताई थी।

चुनाव आयोग के कहा कि SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।

अधिकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े कानून और सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में यह बात कही गई है कि जहां तक संभव हो, फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और जरूरत पड़ने पर बहुमत की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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