दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट बोला-कोई पाबंदी काम नहीं करेगी:कहा- हम जितने ज्यादा आदेश देंगे, नियमों का उल्लंघन उतना ही बढ़ेगा

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए वह जितने ज्यादा आदेश और पाबंदियां लगाएगा, उनका उल्लंघन उतना ही बढ़ेगा।

कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ सख्त नियम बनाने से प्रदूषण की समस्या हल हो सकती है? बेंच ने प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत बताई।

मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट दिवाली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई करेगा।

CJI बोले- दिल्ली का AQI पहले ही 400 तक पहुंच रहा है, सुनवाई की 5 बड़ी बातें…

  • दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए तुरंत, मध्यम अवधि और लंबे समय के उपाय करने की जरूरत है।
  • हम लगातार बातें कर रहे हैं, बयान दे रहे हैं और सुझाव दे रहे हैं, लेकिन असली बात यह है कि AQI पहले ही 400 तक पहुंच रहा है।
  • दिल्ली की सड़कों और NCR को जोड़ने वाले रास्तों को देखिए। किसी भी सड़क पर चलने वाले गाड़ियो की संख्या और उनके प्रकार पर नजर डालिए। यही सबसे बड़ी समस्या है।
  • किसानों को खेतों में आग लगाने के बजाय मशीनों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना चाहिए।
  • प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के प्रयासों पर सवाल उठाते हुए तंज कसा, ‘उम्मीद है आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।’ दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को उठाना पड़ता है।

प्रदूषण रोकने के लिए 5 प्रमुख क्षेत्रों में नियम बनाए गए

केंद्र सरकार और अन्य अधिकारियों की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों में नियम बनाए गए हैं। इनमें उद्योगों से निकलने वाला धुआं, गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, सड़कों की धूल और पराली जलाना शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कुछ आदेश जारी करेगा।

वहीं, सीनियर वकील अमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है, यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 30 सिगरेट पी रहा हो।

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