जीडीपी विकास दर को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। विपक्ष की ओर से इसे लेकर कई तर्क दिए जा रहे हैं। विवाद तब और बढ़ा जब पूर्व वित्त सचिव एस.सी. गर्ग ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी विकास दर को कम करके इस बार 7.8 की बढ़ोतरी दिखाई जा रही है।
जबकि भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् और प्रख्यात अर्थशास्त्री टी.सी.ए. अनंत ने बताया कि जीडीपी मापने के नए आधार वर्ष 2022-23 पर पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के जीडीपी में गिरावट सामान्य बात है। पिछले साल इस अवधि के जीडीपी को आधार वर्ष 2011-12 पर मापा गया था। तब जीडीपी 86.1 लाख करोड़ था। नए आधार वर्ष पर यह जीडीपी घटकर 80 लाख करोड़ हो गया। यह भी ध्यान रहे कि वित्त विभाग से उर्जा मे भेजे जाने के बाद गर्ग ने वोलंटरी रिटायरमेंट ले लिया था।
भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् और प्रख्यात अर्थशास्त्री टी.सी.ए. अनंत ने बताया कि नए आधार वर्ष 2022-23 पर जीडीपी गणना के फैसले के बाद वित्त वर्ष 2022-23, वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25 और वित्त वर्ष 2025-26 के सभी जीडीपी व अन्य आंकड़ों को नए आधार वर्ष के मुताबिक बदल दिया गया। इस बदले हुए आंकड़ों से ही पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी की तुलना इस साल की समान अवधि से की गई और यही चलन है। लेकिन विपक्ष की ओर से इसी पर विवाद खड़ा किया जा रहा है।
यही कारण है कि 2011-12 के आधार वर्ष पर पिछले वित्त वर्ष 2025-26 का जीडीपी 357 लाख करोड़ था जो नए आधार वर्ष 2022-23 पर घटकर 345 लाख करोड़ हो गया। अनंत के मुताबिक वर्ष 2015 में जब जीडीपी मापने के आधार वर्ष 2004-05 को बदलकर 2011-12 किया गया था, तब भी इस प्रकार की शिकायतें हुईं थी।