वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई इकोसिस्टम में एमडीआर परिवर्तन विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है।
मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि 2016 में लांच होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। विदेशी प्रभाव संबंधी दावे गलत हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘इस फैसले पर पुनर्विचार का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।’ सरकार का यह स्पष्टीकरण विपक्ष, व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़ी संस्थाओं के कड़े विरोध के बीच आया है, जिन्होंने इस कदम को ‘मोदी टैक्स’ करार दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस कदम की तीखी आलोचना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के आगे झुकने का आरोप लगाया है।