1 ही दिन में 5% बढ़ी तेल की कीमत, त्योहारी सीजन से पहले फिर बैंक लोन के महंगाई की आहट!

ईरान पर अमेरिका के ताजा हमले से कच्चे तेल की कीमत का रुख एक बार फिर से तेज दिख रहा है। एक ही दिन में ब्रेंट क्रूड की कीमत 5% की बढ़ोतरी के साथ 95 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई जो पिछले चार सप्ताह में सबसे अधिक है। कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी का रुख जारी रहा तो सितंबर की खुदरा महंगाई दर आसानी से 5% को पार कर जाएगी। इससे अक्टूबर-नवंबर के त्योहारी सीजन की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ेगी महंगाई

देश में त्योहार के दौरान सबसे अधिक इलेक्ट्रानिक्स उपभोक्ता वस्तु, कपड़े, बर्तन और वाहनों की खरीदारी की जाती है। पेट्रोलियम से प्लास्टिक, केमिकल्स, सिंथेटिक्स फाइबर समेत कई औद्योगिक कच्चे माल भी बनते हैं। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से इस तरह के सभी कच्चे माल महंगे हो जाएंगे जिससे रिटेल उत्पाद की कीमत प्रभावित होगी। कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से देश की खुदरा महंगाई दर में करीब 0.5 प्रतिशत का इजाफा हो जाता है।

पिछले हफ्ते में ब्रेंट क्रूड की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के पास थी। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से पेट्रोल व डीजल की कीमत नहीं बढ़ाने पर घरेलू ढुलाई का खर्च नहीं बढ़ेगा, लेकिन आयात होने वाले सभी माल का ढुलाई खर्च बढ़ जाता है। इन सब के अलावा खाद भी महंगी होने लगती है।

दाम बढ़ने पर व्यापार में असर

उद्यमियों ने बताया कि त्योहार के समय महंगाई दर बढ़ने से खरीदारी के पूरे माहौल पर असर पड़ता है। जिन वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ती है, उनकी बिक्री भी प्रभावित हो जाती है। महंगाई के शोर से लोग खर्च कम कर देते हैं। गारमेंट सेक्टर से जुड़े लोगों ने बताया कि फूड आयटम्स की कीमतों के बढ़ने से गारमेंट की खरीदारी प्रभावित होने लगती है। लोग अक्सर दो गारमेंट की जगह एक गारमेंट की खरीदारी करते हैं।

इलेक्ट्रानिक्स रिटेलर्स ने बताया कि मोबाइल फोन की कीमत पहले ही पिछले साल की तुलना में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। कीमत में और बढ़ोतरी होने पर निश्चित रूप से बिक्री प्रभावित होगी।

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