तमिलनाडु सरकार ने रविवार को पब्लिक लॉ एंड ऑर्डर विभाग को RTI से मिली छूट वापस ले ली। यह फैसला आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों बाद लिया गया।
सरकार ने पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार शिकायतों और राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े रिकॉर्ड्स को RTI से बाहर करने का आदेश दिया था। यानी सरकार ऐसे मामलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने वाली थी।
लेकिन इस पर सहयोगी दलों और पारदर्शिता के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
विपक्ष ने सवाल उठाए
CPI(M) सांसद सु वेंकटेशन ने भी फैसले पर सवाल उठाए। मूल आदेश में पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) विभाग को तमिलनाडु सरकार की ओर से बनाई गई इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी संस्था बताया गया था।
सरकार से जुड़े सुत्रों के मुताबिक, विवादित फैसले पहले सार्वजनिक किए जाते हैं। इसके बाद सरकार राजनीतिक और जनता की प्रतिक्रिया देखकर उन्हें जारी रखने या वापस लेने का फैसला करती है।
तमिलनाडु के प्रमुख भ्रष्टाचार-विरोधी संगठन अरप्पोर इयक्कम ने मूल फैसले को “चौंकाने वाला” बताया था। संगठन ने कहा था कि सरकार ने पब्लिक विभाग की लॉ एंड ऑर्डर विंग को RTI Act से बाहर कर दिया।
संगठन ने कहा, “पब्लिक विभाग की लॉ एंड ऑर्डर विंग के पास मौजूद हर सूचना को इंटेलिजेंस से जुड़ा बताना बेतुका है। तमिलनाडु सरकार को यह आदेश तुरंत वापस लेना चाहिए।”