गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के शेयरों में 13% की गिरावट दर्ज की गई। 2004 में कंपनी के पब्लिक होने के बाद से यह एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इस बिकवाली के कारण कंपनी की मार्केट वैल्यू 500 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹48 लाख करोड़ घट गई।
अल्फाबेट ने बुधवार रात तिमाही नतीजे जारी किए थे। कंपनी का फ्री कैश फ्लो माइनस 9.07 बिलियन डॉलर पर आ गया, जबकि एक्सपर्ट्स को 2.7 बिलियन डॉलर के पॉजिटिव कैश फ्लो की उम्मीद थी। कंपनी ने अपने पूरे साल के कैपिटल एक्सपेंडिचर के गाइडेंस को $195 बिलियन से $205 बिलियन यानी करीब ₹18 से ₹19 लाख करोड़ के बीच बरकरार रखा है।
इसका मतलब यह है कि गूगल AI की रेस में आगे रहने के लिए डेटा सेंटर्स, सर्वर और चिप्स खरीदने पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है। इससे उसके पास आने वाले पैसों के मुकाबले जेब से जाने वाला खर्च इतना बढ़ गया कि उसका फ्री कैश फ्लो माइनस ₹76,000 करोड़ पर पहुंच गया,जबकि बाजार को मुनाफे की उम्मीद थी।
यानी कंपनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश तो कर रही है, लेकिन उससे अभी वैसी कमाई नहीं निकल पा रही है, जिससे घबराकर इन्वेस्टर्स ने शेयर बेच दिए।
सर्च बिजनेस की सुस्त ग्रोथ बनी गिरावट की वजह
गूगल की कमाई का सबसे बड़ा जरिया सर्च एडवरटाइजिंग है। सितंबर तिमाही में यह 12% बढ़कर $63.35 बिलियन यानी करीब 6 लाख करोड़ रहा, लेकिन एनालिस्ट्स के अनुमान से पीछे रह गया। अल्फाबेट के चीफ बिजनेस ऑफिसर फिलिप शिंडलर ने कहा कि एआई मोड के भीतर कम मॉनेटाइजेशन के कारण सर्च बिजनेस पर असर पड़ा है।
ChatGPT से गूगल सर्च को मिल रही टक्कर
ओपनएआई के ChatGPT और एंथ्रोपिक के Claude जैसे AI चैटबॉट्स के आने से गूगल के दबदबे को चुनौती मिल रही है। यूजर अब गूगल के बाहर भी सर्च क्वेरी कर रहे हैं।
400 करोड़ यूजर्स गूगल की सबसे बड़ी ताकत
चुनौतियों के बावजूद बाजार विशेषज्ञ गूगल के भविष्य को लेकर हताश नहीं हैं। रोजेनब्लाट सिक्योरिटीज के एनालिस्ट स्कॉट डेविट का कहना है कि यह कोई स्थायी बदलाव नहीं है।
उन्होंने कहा, अल्फाबेट के पास 400 करोड़ यूजर्स का बेस है। जब AI में विज्ञापनों और कमाई का मॉडल सेट हो जाएगा, तो यही यूजर्स AI कस्टमर बन जाएंगे, जो कंपनी को मजबूत करेगा।”