एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कहा कि तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही देरी से भारतीय वायुसेना को नुकसान हो रहा है। मौजूदा हालात में चुनौतियों से निपटने के लिए हवाई ताकत बहुत जरूरी होती जा रही है और वायुसेना के पास फाइटर जेट स्क्वाड्रन की संख्या कम हो रही है।
एयर चीफ ने कहा कि वायुसेना को अगले कुछ साल हर साल कम से कम 36-40 फाइटर जेट चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि तेजस मार्क-1A और फ्रांस से लिए जाने वाले राफेल जेट की आपूर्ति से स्थिति सुधरेगी।
उन्होंने पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यह चिंता की बात है, हमें इस कमी को पूरा करना होगा; अगर दूसरी तरफ J-35 मिल रहे हैं, तो हमें भी पांचवीं पीढ़ी के मिसाइल सिस्टम पर विचार करना होगा।”
वायुसेना तेजस समेत कई फाइटर जेट को शामिल करना चाहती है, क्योंकि उसके फाइटर जेट स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है। स्क्वॉड्रन की आधिकारिक मंजूर संख्या 42 है।