टाटा ट्रस्ट ने एन. चंद्रशेखरन को दोबारा 5 साल के लिए टाटा संस का चेयरमैन बनाने के फैसले को गैरकानूनी बताया है।
ट्रस्ट ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि कंपनी के नियमों के मुताबिक चेयरमैन पद के लिए उनके दोनों प्रतिनिधियों की सहमति अनिवार्य है।
टाटा संस में 66% हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास ही है, इसलिए उसके इस विरोध का असर कंपनी के लीडरशिप फैसले पर पड़ सकता है।
ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के खिलाफ वोट दिया तो सिर्फ बोर्ड के बाकी मेंबर्स के वोट से यह प्रस्ताव पास नहीं हो सकता।
दरअसल, मतभेदों के चलते चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था और लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ाने का फैसला कर लिया। अभी इस फैसले को सालाना आम बैठक की मंजूरी मिलना बाकी है।