जलवायु परिर्वतन की बढ़ती चुनौतियों के बीच ग्लोबल लेवल पर फिर से जीवाश्म ईंधन (Fossil fuels) से निर्भरता घटाने को लेकर चर्चा तेज हुई है। इस कड़ी में 9 नवंबर से तुर्किए में शुरू हो रही कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP31) के एजेंडे में कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी को 35% तक बढ़ाने के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया है। जिसे 2035 तक हासिल करने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि मौजूदा समय में दुनिया में कुछ ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 20% ही है। ग्लोबल पर यह पहल तब की गई है, जब रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। भारत में मौजूदा समय में इसकी क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।