टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचाने के टाटा ट्रस्ट ने एक नया प्लान बनाया है। RBI के नियमों के अनुसार, टाटा संस जैसी बड़ी वित्तीय निवेश कंपनियां ‘अपर-लेयर NBFC’ की कैटेगरी में आती हैं, जिसके तहत उन्हें कानूनन शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है।
इस प्लान के तहत टाटा की दो अलग कंपनियों- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस के साथ मर्जर किया जाएगा। मर्जर के बाद टाटा संस एक वित्तीय निवेश कंपनी के बजाया ऐसी कंपनी बन जाएगी जो खुद भी सेवाएं या सामान बनाती और बेचती है।
ऐसा करने से टाटा संस RBI के कड़े नियमों के दायरे से बाहर हो जाएगी। जब कंपनी दायरे से बाहर हो जाएगी, तो उस पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का कानूनी दबाव भी खत्म हो जाएगा और टाटा समूह अपनी होल्डिंग कंपनी का नियंत्रण पूरी तरह अपने पास बनाए रख सकेगा।
अपने 100 साल के सफर में 80 साल तक टाटा संस ने इसी तरह खुद का बिजनेस चलाया है। उदाहरण के लिए, 2004 तक TCS कोई अलग कंपनी नहीं, बल्कि टाटा संस का ही एक हिस्सा था। इस नए मर्जर से टाटा संस एक बार फिर अपने इसी पुराने कारोबारी मॉडल पर लौट आएगी।