पूर्व CJI सभरवाल के कारोबारी बेटों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, आयकर आकलन का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश वाईके सभरवाल के दो कारोबारी बेटों के आयकर आकलन का रास्ता साफ कर दिया है। यह मामला 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर एक प्रमुख संपत्ति खरीदने के लिए किए गए शेयर लेनदेन से जुड़ा है।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने चेतन और नितिन सभरवाल की चार अपीलें खारिज कर दीं और आकलन वर्ष 2008-09 और 2009-10 के लिए जारी आयकर पुन: आकलन नोटिसों को बरकरार रखा। जस्टिस सभरवाल एक नवंबर, 2005 से 14 जनवरी, 2007 तक देश के 36वें प्रधान न्यायाधीश थे।

शीर्ष अदालत ने कहा कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-147 और धारा-148 के तहत आयकर विभाग की ओर से 31 मार्च, 2015 को जारी नोटिस के लिए विश्वास करने का वैध आधार था।

शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर के अपने फैसले में कहा कि महानिदेशक की जांच रिपोर्ट में इस बात का ठोस साक्ष्य था, जिसके आधार पर आकलन अधिकारी के पास यह मानने का कारण था कि करयोग्य आय का आकलन नहीं हुआ था। विश्वास करने का आधार होने का मतलब कारण या औचित्य से है और अधिकारी के लिए यह अंतिम रूप से साबित करना जरूरी नहीं कि आय का आकलन नहीं हुआ था।

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