देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह में बोर्डरूम की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड ने 3 घंटे चली बैठक में दो बड़े फैसले किए। पहला, एन. चंद्रशेखरन को तीसरी बार 5 साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने को मंजूरी दी।
दूसरा, टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए। हालांकि टाटा संस में 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने इसे कानूनन अमान्य करार दिया है।
ट्रस्ट्स ने बयान जारी कर कहा है कि बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के पक्ष में चार डायरेक्टर और विरोध में नोएल टाटा (रतन टाटा के सौतेले भाई) थे। इसके बावजूद टाटा ट्रस्ट्स 4-1 बहुमत को पर्याप्त नहीं मानता। इसलिए उसे यह नियुक्ति स्वीकार नहीं है।