अडाणी ग्रुप की पांच कंपनियों ने सेबी के साथ चल रही कानूनी कार्यवाही को सुलझा लिया है। इसके लिए अडाणी ग्रुप की कंपनियों ने कुल 1.5 करोड़ रुपए का सेटलमेंट अमाउंट चुकाया है।
यह मामला रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन, ऑडिट और लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट्स के खुलासे से जुड़े नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था।
सेबी के सेटलमेंट आदेश के अनुसार, यह पूरी कार्यवाही जनवरी 2023 में बंद हो चुकी अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच पर आधारित थी।
क्या थे अडाणी ग्रुप पर आरोप?
यह पूरा मामला रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन का खुलासा न करने और अमान्य पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट वाली ऑडिट फर्म से रिपोर्ट साइन कराने से जुड़ा था।
RPT का खुलासा न करना: अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) पर आरोप था कि उसने FY13 की अपनी एनुअल रिपोर्ट में अपनी सब्सिडियरी अडाणी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और अपनी रिलेटेड-पार्टी वाकोडर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के बीच हुए RPT का खुलासा नहीं किया था।
बिना पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट के साइन: AEL की FY15 की ऑडिट रिपोर्ट और जून 2015 तिमाही की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट को एक ऐसी ऑडिट फर्म ने साइन किया था, जिसके पास मान्य पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट नहीं था।
इसके अलावा जून 2017, सितंबर 2017 और दिसंबर 2021 तिमाहियों की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट्स पर भी इसी तरह बिना पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट वाली फर्म ने दस्तखत किए थे।
अन्य 4 कंपनियों पर आरोप: अडाणी टोटल गैस, AWL एग्री बिजनेस, अडाणी ग्रीन एनर्जी और अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस पर भी बिना वैलिड पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट वाली ऑडिट फर्म से लिमिटेड-रिव्यू या ऑडिट रिपोर्ट्स साइन कराने का आरोप था।