सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैध और अधिकृत तरीके से भारत आया विदेशी नागरिक भी UAPA के मामले में जमानत का हकदार हो सकता है। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने केंद्र की अपील खारिज करते हुए कहा कि NIA यह साबित नहीं कर पाई कि आरोपी भारत में अवैध तरीके से दाखिल हुआ था।
बेंच ने कहा कि विदेशी नागरिक को UAPA की धारा 43D(7) के तहत जमानत देने की शर्तें सख्त हैं। FIR में भी कहा गया है कि रिफास वैध वीजा के जरिए भारत आया था।
क्या है श्रीलंकाई नागरिक का मामला
आरोपी मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास श्रीलंकाई नागरिक है। NIA के मुताबिक वह 2009 में वैध वीजा पर भारत आया था और वीजा खत्म होने के बाद भी यहीं रुक गया। उस पर धार्मिक समुदायों में तनाव फैलाने, सरकार के खिलाफ साजिश, और फर्जी वोटर ID, आधार व राशन कार्ड बनवाने का आरोप है।
ट्रायल कोर्ट ने 2018 में चार्जशीट में देरी पर उसे डिफॉल्ट जमानत दी थी, जिसे बाद में केंद्र की अर्जी पर रद्द कर दिया गया। 12 दिसंबर 2023 को मद्रास हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का जमानत रद्द करने का आदेश पलट दिया। केंद्र इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
UAPA की धारा 43D(7) में तीन शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UAPA की धारा 43D(7) के तहत विदेशी नागरिक को जमानत देने से रोकने के लिए अभियोजन पक्ष को तीन बातें साबित करनी होंगी।
- पहली- आरोपी पर UAPA के तहत सजा वाले अपराध का आरोप हो।
- दूसरी- आरोपी भारतीय नागरिक न हो।
- तीसरी- उसने भारत में अनधिकृत, अवैध तरीके से प्रवेश किया हो।
कोर्ट ने कहा कि दूसरी और तीसरी शर्तें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। इनके बीच ‘और’ शब्द का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए, विदेशी नागरिक को जमानत से वंचित करने के लिए दोनों शर्तों का पूरा होना जरूरी है।