अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92% हो गई। जुलाई में यह 9.78% थी। खाने-पीने की चीजें, फ्यूल, पावर और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स महंगे होने की वजह से यह बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने आज, 14 सितंबर को ये आंकड़े जारी किए।
महंगाई दर 9.92% होने का मतलब यह है कि जो सामान पिछले साल इस समय थोक बाजार में ₹100 का मिल रहा था, वह आज लगभग ₹109.92 का है।
खाने-पीने की चीजें भी महंगी
आम आदमी की रसोई से जुड़े फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी तेजी आई है। थोक मूल्य सूचकांक में फूड इंडेक्स की हिस्सेदारी 24.99% होती है। अगस्त 2026 में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई बढ़कर 7.05% पर पहुंच गई, जो जुलाई में 6.65% थी।
प्राइमरी आर्टिकल के तीन मुख्य हिस्से हैं
- फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, सब्जियां
- नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
- मिनरल्स
थोक महंगाई का आम आदमी पर असर
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं।
सरकार केवल टैक्स के जरिए होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) को कंट्रोल कर सकती है, जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।