सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हिंदू धर्म से गैर-हिंदू धर्म अपनाने वाला व्यक्ति पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है।
दरअसल, सरकार ने 9 मार्च 2024 को पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की अनुमति दी थी।
लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी। हालांकि, कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि हिंदू व्यवस्था से गैर-हिंदू व्यवस्था में जाने वाला व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत सिर्फ पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई का दावा नहीं कर सकता।