2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगने वाला 0.4% शुल्क यानी MDR ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, MDR का एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा। यह रकम UPI सिस्टम से जुड़े बैंकों और दूसरी संस्थाओं में बांटी जाएगी।
सरकार ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें MDR को ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स बताया गया था। सूत्रों ने कहा कि MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज।
कुल MDR में से 40% रकम ग्राहकों के बैंकों को मिलेगी। 30% पेमेंट गेटवे, 20% UPI ऐप और बाकी 10% रकम UPI ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।