दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को शामिल करने संबंधी याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया. मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष, वित्त और गृह मंत्रालयों को नोटिस जारी किया तथा उन्हें आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की.
याचिका में नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को शामिल करने का अनुरोध किया गया है. पीएम-जेएवाई को ही ‘आयुष्मान भारत’ कहा जाता है.
वर्ष 2018 में शुरू की गयी योजना ‘आयुष्मान भारत’ के दो मुख्य घटक हैं – पीएम-जेएवाई तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की वेबसाइट के अनुसार, आयुष्मान भारत के तहत 12 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों (लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों) को प्रति वर्ष प्रति परिवार पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है.
याचिकाकर्ता वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन बसर करने वाले लोगों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) हासिल करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 के अनुरूप एक प्रमुख योजना ‘आयुष्मान भारत’ शुरू की है, लेकिन आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा जैसी भारतीय प्रणालियां इसमें शामिल नहीं हैं.
याचिका में कहा गया है, ‘‘आयुष्मान भारत मुख्य रूप से एलोपैथिक अस्पतालों और औषधालयों तक ही सीमित है, जबकि भारत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्ध, यूनानी, होम्योपैथी सहित विभिन्न स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों का दावा करता है, जो भारत की समृद्ध परंपराओं में निहित हैं और वर्तमान समय की स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं से निपटने में अत्यधिक प्रभावी हैं.’