भारत ने रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड (India vs England) को हराकर टेस्ट सीरीज अपने नाम कर ली है. भारतीय टीम ने रांची में खेले गए चौथे टेस्ट में इंग्लैंड को 5 विकेट से हराया. भारतीय क्रिकेट टीम इस मैच में दोनों ही पारियों में जब-जब सबसे ज्यादा दबाव में थी, तब एक ही खिलाड़ी ने संकट से उबारा. कोई शक नहीं कि मैच के बाद उसे ही रांची टेस्ट का बेस्ट प्लेयर चुना गया. नाम है ध्रुव जुरेल. 23 साल का यह क्रिकेटर अपने दूसरे ही टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच (Dhruv Jurel Player of the match) चुना गया.
बेन स्टोक्स की कप्तानी में खेल रहे इंग्लैंड के खिलाफ (India vs England) राजकोट टेस्ट में डेब्यू करने वाले ध्रुव जुरेल ने दो मैच के बाद ही यह संकेत दे दिया है कि भारत की विकेटकीपर बैटर की तलाश पूरी होने वाली है. 23 साल के ध्रुव जुरेल (Dhruv Jurel) ने इंग्लैंड के खिलाफ रांची टेस्ट की पहली पारी में तब 90 रन की पारी खेली जब भारत 177 रन पर 7 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रहा था. जुरेल ने यहां से पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारत को 307 रन तक पहुंचा दिया. एक समय जहां लग रहा था कि इंग्लैंड पहली पारी में भारत पर 140-150 रन की बढ़त ले सकता है, लेकिन ध्रुव जुरेल ने इसे 45 रन तक सीमित कर दिया.
महज 12 साल की उम्र में क्रिकेटर बनने के लिए घर से भागकर नोएडा पहुंचे ध्रुव जुरेल का निजी जीवन का संघर्ष भी कम नहीं है. उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए पिता ने उधार लेकर बैट खरीदा. मां ने तो गले से उतारकर सोने की चेन बेच दी कि बेटे के क्रिकेटर बनने के ख्वाब में कहीं कोई कमी ना रह जाए. जब मां-बाप ने यूं संघर्ष किया हो तो बेटा भला पीछे कैसे रहता. रांची टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने एक नहीं, दो-दो बार इंग्लैंड के गेंदबाजों को तब नाकों चने चबवाए, जब भारतीय टीम (Team India) के बाकी बैटर्स दबाव में थे.
192 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भी जब भारतीय टीम (India Cricket Team) 120 रन पर 5 विकेट गंवा चुकी थी तब ध्रुव जुरेल मैदान पर उतरे. इंग्लैंड को उम्मीद थी कि बस एक-दो विकेट और गिराओ और जीत का रास्ता साफ. भारतीय क्रिकेटफैंस को भी यही डर था कि अगर-एक दो विकेट और गिरे तो बाजी गई हाथ से. इस मौके पर आए ध्रुव जुरेल ने पूरी जिम्मेदारी से एक छोर संभाला और शुभमन गिल के साथ मिलकर टीम को जीत दिला दी.