असम में सिर्फ 7.8 फीसदी महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में

गुवाहाटी, -असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में कुल 946 उम्मीदवारों में सिर्फ 7.8 प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं, जिससे महिला कार्यकर्ताओं और लेखिकाओं में असंतोष है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नितिन खाडे के अनुसार, कुल 946 उम्मीदवारों में से 74 महिलाएं हैं, जबकि कुल 2,33,74,087 मतदाताओं में से 1,15,50,403 महिलाएं हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में तीन चरणों (27 मार्च, 1 व 6 अप्रैल) के लिए बनाए गए 33,530 मतदान केंद्रों में से 1,351 केंद्रों का प्रबंधन महिलाओं के जिम्मे है।
तीसरे और अंतिम चरण में 6 अप्रैल को मतदान 40 सीटों के लिए होगा।

महिला मतदाताओं की कुल संख्या 49.41 प्रतिशत होने के बावजूद, केवल 74 (7.8 प्रतिशत) महिला उम्मीदवार हैं, जिनमें 23 निर्दलीय हैं।
साल 2016 के असम विधानसभा चुनाव में 91 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में थीं, जिनमें से आठ निर्वाचित हुईं।

साल 2011 में 85 महिलाओं ने अपने चुनावी भाग्य को आजमाया था और सदन में अब तक के सबसे अधिक 14 सफल रहे थे।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन को शिकस्त देने के लिए 10 पाटियों का महाजोत (महागठबंधन) का गठन करने वाली विपक्षी कांग्रेस ने इन चुनावों में मात्र नौ महिला उम्मीदवार खड़े किए हैं।

इसके चुनावी साझीदारों- ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने एक-एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।

साल 2016 के चुनावों में, कांग्रेस ने 16 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
प्रमुख विपक्षी दल ने इस बार कुल 95 उम्मीदवार उतारे हैं और बाकी सीटें अपने सहयोगियों को आवंटित की हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा ने सात महिला उम्मीदवारों को नामित किया है, जो 2016 के चुनावों के दौरान एक से अधिक है, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असोम गण परिषद (एजीपी) ने पिछले चुनावों की तरह दो महिला उम्मीदवारों को रखा है।

कुल 93 उम्मीदवारों को मैदान में उतारने वाली भाजपा, अपने पुराने सहयोगी एजीपी के अलावा, युनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और गण सुरक्षा पार्टी (जीएसपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

नवगठित पार्टी असम जनता परिषद (एजेपी) ने सात महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि अन्य नई पार्टी रायजोर दल ने एक महिला प्रत्याशी को टिकट दिया है।
एजेपी और रायजोर दल के उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

इसके अलावा, कई महिला कार्यकर्ताओं और महिलाधिकार निकायों, प्रसिद्ध असमिया लेखिका ताप्ती बरुआ कश्यप और रत्ना भराली तालुकदार ने महिला उम्मीदवारों की कम संख्या पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

गुवाहाटी की रहने वाली पुरस्कार विजेता लेखिका और महिलाओं के अधिकारों की पैरोकार ताप्ती ने कहा कि महिलाओं में समाज को नियंत्रित करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें राजनीति और शासन में ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

उन्होंने कहा, चूंकि हमारा समाज पितृसत्तात्मक है, इसलिए पुरुषों का समाज और सरकार के हर क्षेत्र में वर्चस्व बना रहता है। इसे महिलाओं की उपेक्षा और उनकी क्षमता को पहचानने में विफलता ही कहा जा सकता है। शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां महिलाओं ने पुरुषों में बेहतर प्रदर्शन किया है।

प्रसिद्ध लेखिका ताप्ती ने 12 किताबें लिखी हैं और कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पुरुष-प्रधान संस्कृति की मानसिकता को बदलने के लिए महिलाओं को बड़ी संख्या में आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं की न्यूनतम 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए।

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