अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए केंद्र से जवाब तलब


सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया।

इस याचिका में अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए निर्देश व देश में लगातार बालू खनन के लिए दिशानिर्देश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, खान मंत्रालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) व तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब व मध्य प्रदेश राज्य को इस जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस जनहित याचिका को वकील व सामाजिक कार्यकर्ता एम.अलगरसामी ने दायर किया है।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश होते हुए वकीलों प्रशांत भूषण, प्रणव सचदेवा व अभिषेक प्रसाद ने पीठ को बताया कि बहुत से कानून, नियम व अधिनियम हैं, जो राज्य सरकार को अवैध खनन, परिवहन व भंडारण को रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति देते हैं।

याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकारों ने अदालत द्वारा पारित किए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है। अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि खनन पट्टे व पर्यावरण मंजूरी सिर्फ उन्हीं संस्थाओं को दिया जाना चाहिए, जिनके पास स्थायी खनन के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी दी गई खनन योजना है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अवैज्ञानिक खनन से भूमि का ह्रास हुआ है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्यों द्वारा दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन की कमी के कारण देश भर में कई बालू खनन घोटाले हुए हैं। इसलिए वह सीबीआई को निर्देश देने की मांग करते हैं कि वह इन घोटालों की जांच करे।

उन्होंने शीर्ष अदालत से निर्देश जारी करने का आग्रह किया कि बिना पर्यावरण मंजूरी (ईसी) के किसी बालू खनन परियोजना को मंजूरी नहीं दी जाए।

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